सिक्का बदल गया कहानी - कृष्णा सोबती

'कृष्णा सोबती' हिन्दी साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका रही हैं। ये विभाजन के मूल की रचनाकार हैं। अतः उनकी रचनाओं में विभाजन की स्थितियों का वर्णन हुआ है। उन्होंने हिन्दी कथा साहित्य को नए रचनात्मक आयाम दिए हैं। उनकी कहानियों का कथ्य और शिल्प दोनों ही रचनात्मक हैं। देश विभाजन से सम्बन्धित कृष्णा सोबती की कहानियों में सबसे चर्चित एवं प्रसिद्ध कहानी "सिक्का बदल गया' है। यह कहानी वर्ष 1948 में 'प्रतीक पत्रिका' में प्रकाशित हुई। 

    कृष्णा सोबती का जीवन परिचय

    लेखि‍का का नाम :- कृष्णा सोबती (Krishna Sobti)

    जन्म :- 18 जनवरी 1925

    मृत्यु :- 25 जनवरी, 2019 (नई दिल्ली)

    पिता व माता का नाम :- श्री दीवान पृथ्वीराज सोबती, श्रीमती दुर्गा देवी

    पति का नाम :- शिवनाथ

    प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ :-

    • उपन्यास -

      1. सूरजमुखी अँधेरे के (1972)
      2. ज़िन्दगी़नामा (1979)
      3. दिलोदानिश (1993)
      4. समय सरगम (2000)
      5. गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान (2017)

    • विचार/संवाद/संस्मरण -

      1. हम हशमत (तीन भागों में)
      2. सोबती एक सोहबत
      3. शब्दों के आलोक में
      4. सोबती वैद संवाद
      5. मुक्तिबोध : एक व्यक्तित्व सही की तलाश में 
      6. लेखक का जनतंत्र 
      7. मार्फ़त दिल्ली 

    • कहानी संग्रह - डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, यारों के यार, ऐ लड़की, सिक्का बदल गया, मेरी माँ कहा है आदि। 
    • यात्रा-आख्यान - बुद्ध का कमण्डल : लद्दाख़
    पुरस्कार और सम्मान :- ज्ञानपीठ पुरस्कार (वर्ष 2017), साहित्य अकादमी पुरस्कार (वर्ष 1982),  शलाका सम्मान आदि। 
    Sikka Badal Gaya Kahani - Krishna Sobti

    'सिक्का बदल गया' कहानी की का विषय

    • विभाजन की त्रासदी का वर्णन। 
    • संवेदनशील संबंधों का टूटना। 
    • मानवीय संवेदनाओं का मूल्यहीन होना।
    • सद्भाव का संदेश। 

    सिक्का बदल गया कहानी के प्रमुख पात्र 

    शाहनी - कहानी की मुख्य पात्र है, जिसके पति शाहजी का देहान्त हो चुका है। वह बड़ी हवेली की मालकिन है, जिसे विभाजन के बाद हवेली छोड़नी पड़ती है। 

    शेरा - शाहजी का सेवक था। उसकी माँ की मृत्यु के बाद शाहनी ने उसका पालन-पोषण किया। वही अन्त में शाहनी को मारने की योजना बनाता है। 

    हसैना - शेरा की पत्नी है, जिसे शाहनी बहुत महत्त्व देती है। 

    थानेदार दाऊद - जो किसी समय शाहजी का वफादार था, आज वही शाहनी को बड़ी हवेली खाली करने को कहता है।

    'सिक्का बदल गया' कहानी की समीक्षा 

    'सिक्का बदल गया' कहानी में विभाजन से उत्पन्न दारुण परिस्थितियों के मार्मिक चित्रण के साथ मानवीय सम्बन्धों और मूल्यों पर आए विघटन का भी वर्णन हुआ है। यह कहानी एक विधवा नारी 'शाहनी' की पराधीनता और विवशता की कहानी है, जिसमें शोषित वर्ग के बदलते सामाजिक मानदण्डों का सफल चित्रण हुआ है। 

    यह कहानी विभाजन की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सत्ता परिवर्तन मानव को नहीं देखता केवल सिक्के को देखता है। कहानी में दर्शाया गया है कि 'शाहनी' जो किसी समय हवेली की मालकिन थी, आज सत्ता बदलने पर उसे हवेली से शरणार्थी बनाकर निष्कासित किया जा रहा है। शाहनी के पति शाहजी (मालिक) के जीवित रहते, जो लोग उनको सलाम करते थे, उनकी मृत्यु के बाद मालकिन को लूटने का मार्ग सोचते हैं। शाहजी के घर में नौकरी करने वाले आसामी आज शोषक वर्ग के विरुद्ध इकट्ठा हो गए हैं। समय बदल गया साथ ही सत्ता के बदलने से सिक्का भी बदल गया है। 

    शाहनी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनी रहती है तथा शरणार्थी कैम्प में जाने को तैयार हो जाती है। वह अपने साथ कुछ भी सामान नहीं ले जाती तथा जाते समय वहाँ उपस्थित लोगों को आशीर्वाद देकर जाती है। कैम्प में पहुँचने पर वह सोचती है कि राज पलट गया तथा सिक्का बदल गया। 

    प्रस्तुत कहानी में स्पष्ट किया गया है कि शासन के बदलते ही सिक्का भी बदल जाता है। बँटवारे के कारण सब कुछ बदल गया, हिन्दू-मुस्लिम की एकता तथा प्रेम सब कुछ चला गया। समय के बदलने पर लोग भी कैसे बदल जाते हैं। इसका उदाहरण कहानी के पात्र शेरा तथा दाऊद हैं। लोगों की स्वार्थपरक नीति का उल्लेख कर उनकी हृदय हीनता को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

    प्रस्तुत कहानी में स्पष्ट किया गया है कि शासन के बदलते ही सिक्का भी बदल जाता है। बंटवारे के कारण सब कुछ बदल गया, हिन्दू-मुस्लिम की एकता तथा प्रेम सब कुछ चला गया। समय के बदलने पर लोग भी कैसे बदल जाते हैं। इसका उदाहरण कहानी के पात्र शेरा तथा दाऊद हैं। लोगों की स्वार्थपरक नीति का उल्लेख कर उनकी हृदय हीनता को दर्शाने का प्रयास किया गया है। 

    इस प्रकार कृष्णा सोबती ने विभाजन के कटु सत्य को उचित तथ्यों के साथ कहानी में प्रस्तुत किया है। कहानी में मुख्य पात्र शाहनी है। वह विधवा स्त्री है, जिसे विभाजन की त्रासदी झेलनी पड़ती है। वह पीड़ित वर्ग के साथ-साथ अकेली, असहाय बूढ़ी स्त्री है, जिसकी शोचनीय दशा का चित्रण इस कहानी में किया गया है। अतः इस कहानी में शाहनी की पराधीनता का मनोवैज्ञानिक चित्रण हुआ है। शाहनी के अतिरिक्त शेरा जिसे शाहनी ने पाल-पोसकर बड़ा किया था, वही मुगल क्रान्तिकारियों से मिलकर उसकी हत्या की योजना में शामिल होता है। थानेदार दाऊद, शेरा की पत्नी हसैना आदि अन्य पात्र हैं, जो कथा को आगे बढ़ाते हैं। 

    कहानी में देश की आजादी की लड़ाई, बँटवारा, हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्धों, हत्या, खून-खराबा, शरणार्थी कैम्प आदि के साथ जिसकी सत्ता थी, वे सत्ताहीन हो गए तथा गद्देदार बिस्तर पर सोने वाले आज दीन-हीन पीड़ित होकर जमीन पर सो रहे हैं आदि का वर्णन कर उस समय के वातावरण को जीवन्त करने का प्रयास किया गया है। 

    इस प्रकार 'सिक्का बदल गया' कहानी में देश के बँटवारे और बेकार के खून खराबे तथा हत्याएँ, अमीर शाही जीवन बिताने वालों की दुर्दशा का चित्रण करना लेखिका का उद्देश्य रहा है, जिसमें वे पूर्णतः सफल हुई हैं।

    सिक्का बदल गया कहानी के महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

      1. कृष्णा सोबती का जन्म सन् 1925 ई. में भारत के अविभाजित पंजाब जनपद (अब पाकिस्तान) में हुआ था। 
      2. हिन्दी साहित्य की समकालीन रचनाकारों में शिल्पगत तथा मध्यगत विभिन्नता के लिए जो नाम उभरकर साहित्य मनीषियों के सम्मुख आते हैं। उनमें महिला लेखकों के सन्दर्भ में कृष्णा सोबती का नाम उल्लेखनीय है। 
      3. नवीनता इनकी रचनाओं में नारी की मानसिकता से जुड़ी स साथ उभारने का प्रयास किया गया है। सच्चाईयों को बड़ी स्पष्टता के साथ प्रस्‍तुत किया है। 
      4. इन्होंने हिन्दी साहित्यिक कथा विधा के अन्तर्गत कहानी और उपन्यास इन दोनों में आपनी रचनाएं की है। 
      5. इनकी रचनाओं में नारी की मानसिकता से जुड़ी सच्चाईयों को बड़ी स्पष्टता के साथ उभारने का प्रयास किया गया है। 
      6. आपके प्रसिद्ध कहानी संग्रह है- मित्रो मरजानी (1966 ई.), बादलों के घेरे (1988 ई.), ऐ लड़की (1990) 
      7. देश विभाजन से संबंधित कृष्णा सोबती की कहानियों में सबसे चर्चित एवं प्रसिद्ध है 'सिक्का बदल गया है'। 
      8. 'सिक्का बदल गया प्रकाशन 'प्रतीक' में 1948 ई. में हुआ था, जब अज्ञेय जी इस पत्रिका के संपादक थे। 
      9. कृष्णा सोबती ने विभाजन के दौरान आए हुए अनुभवों को सुनकर ही अपनी कहानी 'सिक्का बदल गया' लिखी।
      10. 'बादलों के घेरे' में कुल 24 कहानियाँ संकलित है। इन कहानियों को मोटे तौर पर तीन भागों में बाँट सकते हैं 
      •  देश विभाजन से जुड़ी कहानियाँ 
      • ग्रामीण जीवन से संबंधित कहानियाँ 
      • प्रेम और स्त्री-पुरुष संबंधों से जुड़ी कहानियाँ।

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     प्रश्‍न 01. 'सिक्का बदल गया' की पृष्ठभूमि है। 

    1. आजादी की लड़ाई 
    2. भारत का विभाजन 
    3. भारत-पाक संबंध 
    4. इनमें से कोई नहीं 

    उत्तर: 2. भारत का विभाजन


     प्रश्‍न 02. कहानी "सिक्का बदल गया" के केंद्र में कौन-सा पात्र है? 

    1. शाहनी 
    2. शेरा 
    3. मुल्लाह इस्माइल 
    4. दाऊद खां

    उत्तर: 1. शाहनी


     प्रश्‍न 03. शाहनी के मन में किस बात की पीड़ा थी ? 

    1. निःसंतान होने की 
    2. जन्मभूमि छोड़ने की 
    3. पति की मृत्यु की 
    4. इनमें से कोई नहीं

    उत्तर: 2. जन्मभूमि छोड़ने की


     प्रश्‍न 04. कृष्णा सोबती का जन्म 1925 में हुआ था। 

    1. 1875 
    2. 1895 
    3. 1925 
    4. 1920 

    उत्तर: 3. 1925


     प्रश्‍न 05. कृष्णा सोबती मुख्य रूप से हैं? 

    1. कलाकार 
    2. गद्यकार 
    3. व्यंगकार 
    4. कथाकार

    उत्तर: 4. कथाकार


     प्रश्‍न 06. "सिक्का बदल गया" किस समय की कहानी है? 

    1. भारत विभाजन की 
    2. पति के मरने की 
    3. पुत्र वियोग की 
    4. उल्लास की 

    उत्तर: 1. भारत विभाजन की

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