राजा निरबंसिया कहानी - कमलेश्वर

कमलेश्वर बीसवीं सदी के सबसे सशक्त रचनाकारों में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उन्होंने कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, स्तम्भ लेखन, फिल्म, पटकथा जैसी अनेक विधाओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। नई कहानी आन्दोलन को उन्होंने नई दिशा दी। 

'राजा निरबंसिया' उनका प्रथम मौलिक कहानी संग्रह है, जिसमें कुल सात कहानियाँ सम्मिलित हैं-देवा की माँ, पानी की तस्वीर, धूल उड़ जाती है, सुबह का सपना, मुर्दों की दुनिया, आत्मा की आवाज और राजा निरबंसिया। इस कथा संकलन में उनकी सबसे सशक्त कहानी 'राजा निरबंसिया' है। 

    कमलेश्वर का जीवन परिचय

    पूरा नाम -कमलेश्वर प्रशाद सक्सेना  (कमलेश्वर) 

    जन्म - 06 जनवरी 1932 मैनपुरी, उत्तरप्रदेश, भारत, 

    मृत्यु - 27 जनवरी, 2007 (उम्र 74) फ़रीदाबाद, भारत (हृदय रोग से) 

    विधा - कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, स्तंभ लेखन, फिल्म, पटकथा 

    आंदोलन - नई कहानी (मोहन राकेश, मन्नू भंडारी, और राजेंद्र यादव भी शामिल थे ) 

    पुरस्कार - साहित्य अकादमी पुरस्कार (2003) - कितने पाकिस्तान (उपन्यास), प‌द्मभूषण (2005) 

    शिक्षा - 1954 M.A. हिंदी इलाहबाद

    फिल्मो में योगदान -

    • इन्होने फिल्मों के लिए पटकथाएँ (स्क्रिप्ट) भी लिखे है । लगभग 99 फिल्म के इनके कई उपन्यासों पर फिल्मे भी बनी है जैसे - आंधी- मौसम 'सारा आकाश'- 'रजनीगंधा', 'सौतन' - 'लैला' 
    • कमलेश्वर की अंतिम अधूरी रचना अंतिम सफर उपन्यास है, जिसे कमलेश्वर की पत्नी गायत्री कमलेश्वर के अनुरोध पर तेजपाल सिंह धामा ने पूरा किया ।

    कृतियाँ उपन्यास -

    1. एक सड़क सत्तावन गलियाँ- 1957 
    2. डाक बंगला -1959 
    3. लौटे हुए मुसाफ़िर-1961 
    4. समुद्र में खोया हुआ आदमी-1967 
    5. काली आँधी-1974 
    6. तीसरा, आदमी- 1976, 
    7. आगामी अतीत -1976 
    8. वही बात-1980 
    9. सुबह... दोपहर...शाम-1982

    पत्रिकाऍं -

    अपने जीवनकाल में अलग-अलग समय पर उन्होंने सात पत्रिकाओं का संपादन किया -

    1. विहान-पत्रिका (1954) 
    2. नई कहानियाँ-पत्रिका (1958-1966) 
    3. सारिका-पत्रिका (1967-78) 
    4. कथायात्रा-पत्रिका 
    5. गंगा-पत्रिका (1984-88) 
    6. इंगित-पत्रिका (1961-68) 
    7. श्रीवर्षा-पत्रिका (1979-80) 

    अखबारों में भूमिका -

    • कमलेश्वर हिन्दी दैनिक 'दैनिक जागरण' में 1990 ई. से 1992 ई.  तक तथा 'दैनिक भास्कर' : 1997 से लगातार स्तंभलेखन का काम करते रहे।'

    कहानियाँ -

    कमलेश्वर ने अपने जीवन काल में तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखीं। इनमें से उनकी कुछ प्रसिद्ध कहानियाँ हैं -

    जा निरबंसिया, मांस का दरिया, नीली झील, नागमणि, अपना एकांत आसक्ति, तलाश, बयान, ज़िंदा मुर्दे, जॉर्ज पंचम की नाक, मुर्दों की दुनिया, कस्बे का आदमी आदि। 

    Raja Nirbansiya Kahani - Kamleshwar

    राजा निरबंसिया कहानी का विषय

    • आधुनिक जीवन के विसंगतियों का चित्रण
    • दामपत्य जीवन की समस्याएँ। 
    • दोहरी समांतर कहानी। 
    • स्‍त्री के जीवन की त्रासदी 
    • पुरुष के दो रूप
    • स्‍त्री का सतीत्व।

    राजा निरबंसिया कहानी के प्रमुख पात्र 

    जगपती - लेखक का मित्र तथा कहानी का प्रमुख पात्र है, जो मैट्रिक पास करने के बाद गाँव के एक वकील के यहाँ मुंशी हो गया था। 

    बन्दा - जगपती की पत्नी तथा प्रमुख नारी पात्र है, जो सेवाभाव, संवेदनशील तथा सौन्दर्य के गुणों से पूर्ण है। 

    बच्चन सिंह - जिले के अस्पताल का कम्पाउण्डर है, जो जगपती की पत्नी चन्दा पर मोहित है। 

    पौराणिक पात्र - राजा, रानी तथा उनके दो पुत्र।

    'राजा निरबंसिया' कहानी की समीक्षा 

    मुख्यतः राजा निरबंसिया यह एक प्रयोगधर्मी कहानी है। इसमें कहानीकार ने किस्सागोई का प्रयोग किया है। कहानीकार माँ के द्वारा सुनाई गई राजा निरबंसिया की कहानी का उपकथा के रूप में सूत्रपात करता है। लेखक ने दो भिन्न युगों की कहानियों को समानान्तर रूप से लिया है। एक राजा निरबंसिया की पौराणिक कथा तथा दूसरी ओर जगपती निरबंसिया की आधुनिक कथा है। दोनों कहानियों की घटनाएँ लगभग एक तरह की हैं, किन्तु प्रतिक्रियाएँ भिन्न हैं। 

    मुख्य कथा जगपती और उसकी पत्नी चन्दा दोनों के बीच त्रिकोण बने बच्चन सिंह को लेकर चलती है। कहानी में जगपती और चन्दा का जीवन आर्थिक विषमता से त्रस्त है, जिसका सजीव चित्रण हुआ है। आर्थिक कमजोरी में मनुष्य की मजबूरियों का सशक्त वर्णन इस कहानी में हुआ है। जगपती की बीमारी को ठीक करने के लिए उसकी पत्नी चन्दा को अस्पताल के कम्पाउण्डर से रुपये उधार लेने पड़ते हैं। 

    बच्चन सिंह के कर्ज के रुपयों का जहर धीरे-धीरे चन्दा और जगपती के दाम्पत्य सुख को नष्ट कर देता है। बच्चन सिंह चन्दा के सौन्दर्य पर मोहित हो कर्ज के रुपयों के बदले चन्दा के स्त्रीत्व को भंग कर देता है। उस कर्ज का जहर क्रमशः उनके जीवन में फैल जाता है और फैलते जहर के बीच जगपती को जिस अन्तर्द्वन्द्व का सामना करना पड़ता है, वह कहानी में बहुत स्वाभाविक रूप से चित्रित हुआ है।

    जगपती इस पीड़ा से दुःखी है कि वह निःसन्तान है। साथ ही आर्थिक विपन्नता के कारण अपनी पत्नी को दूसरे की अंकशयनी बनता हुए देखकर वह और भी दुःखी हो आत्मग्लानि से भर जाता है। आत्मविश्लेषण के क्षणों में वह चन्दा को पूर्ण निर्दोष पाता है, इसलिए आत्महत्या करने से पहले वह दो परचे छोड़कर जाता है। एक परचे में वह चन्दा को माफ कर उसके पुत्र को अपने पुत्र के रूप में अपना लेता है। दूसरे परचे में वह यह लिखता है कि मेरी लाश तब तक न जलाई जाए जब तक चन्दा बच्चे को लेकर न आ जाए और आग बच्चे के हाथ से दिलवाई जाए। यह इस प्रेम कथा की अद्भुत परिणति है। इस रूप में जगपती हमारे लिए एक बहुत आदर्श पात्र बन जाता है। 

    इस प्रकार सम्पूर्ण कहानी में वर्तमान समय के राजा या नायक जगपती की व्यथा का वर्णन हुआ। कथा के बीच में उसकी अभिव्यक्ति लोककथा के माध्यम से होती है। जैसे ही कहानी जगपती और चन्दा के जीवन के दर्द से बोझिल-सी होने लगती है वैसे ही लोककथा का वर्णन होने लगता है। 

    परम्परागत दन्तकथा आधुनिक कथा के उद्देश्य को प्रकट करने में प्रभावमयता उत्पन्न करती है। लेखक की मूल संवेदना यही है कि वह बदलते हुए परिवेश को देखकर अत्यन्त भावुक हो उठता है। वह देखता है कि आधुनिक मानव संक्रमण की स्थिति में जूझ रहा है। वह पूरी तरह शहरी भी नहीं हो पाया है और कस्बों के संस्कारों को न छोड़ पाने के कारण मूल्यहीन जीवन भी नहीं जी पाता है। यहाँ तक कि वह आत्महत्या तक करने को विवश हो जाता है। इसी संक्रमणकालीन जीवन की विषम परिस्थितियाँ राजा निरबंसिया में देखने को मिलती हैं। प्रस्तुत कहानी में एक कस्बाई परिवेश पूरी तरह से उभरकर सामने आया है। युगीन परिवेश व वातावरण को स्पष्ट करने के लिए ही लेखक ने प्राचीन कथा का आश्रय लिया है। आधुनिक युग के अर्थ लोलुप परिवेश में कैसे मूल्यों का विखण्डन होता है, कैसे नैतिकता का स्खलन होता है? इसको प्राचीन कथा के माध्यम से लेखक और अधिक प्रभावमयता के साथ प्रस्तुत करता है।

    पहले के समय में पति-पत्नी में निःस्वार्थ प्रेम होता था। शारीरिक पवित्रता सर्वोपरि मानी जाती थी। पति-पत्नी अपनी शंका का समाधान तुरन्त करते थे। स्त्री के चरित्र पर शंका होने पर वह सगर्व अग्नि परीक्षा को तत्पर हो जाती थी। ईश्वरीय चमत्कार तथा आचरण की सत्यता के कारण लोग पश्चाताप से नहीं जूझते थे और भयानक मानसिक यन्त्रणाओं से बचे हुए थे। मूल्यों का सर्वाधिक महत्त्व था और उसमें किसी प्रकार की टकराहट नहीं थी। प्राचीन परिवेश की अभिव्यक्ति के साथ ही आधुनिक युग का संघर्षमय व टूटते जीवन मूल्यों वाला परिवेश भी व्यक्त हुआ है। सम्पत्ति मोह के कारण टूटते हुए मूल्य व्यक्ति को, हताशा व अवसाद में धकेल देते हैं। 

    पति-पत्नी का जो रिश्ता सबसे पवित्र व विश्वास का माना जाता था, आज वह समझौतों तक सीमित रह गया है तथा लोगों की आस्थाएँ टूट रही हैं। आज थोड़े से धन के लिए व्यक्ति अपनी पत्नी तक को दाँव पर लगा देता है। कमलेश्वर ने अपनी इसी संवेदना को व्यक्त करने के लिए जीवन में व्याप्त कृत्रिमता, खोखलापन, आडम्बर प्रियता आदि को दिखाने का प्रयास किया है। उन्होंने वैयक्तिक नैतिकता को महत्त्व दिया है। उनके पात्र प्रेम व आर्थिक संघर्ष में टूटते दिखाई देते हैं। आज, संशय, सन्देहों का समाधान नहीं करते, बल्कि मन में गाँठ बाँध लेते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि वर्तमान युग की घुटन, टूटन, संवेदनहीनता को व्यक्त करने का कमलेश्वर जी का यह अनूठा प्रयोग है। 

    कहानी का शीर्षक 'राजा निरबंसिया' पूर्णतः उपयुक्त है, क्योंकि प्राचीन कथा में राजा निरबंसिया है, तो दूसरी ओर आधुनिक कथा में जगपती भी निरबंसिया है। पूरी कथा जगपती और चन्दा के इर्द-गिर्द ही घूमती है। किस प्रकार सन्तान न होने पर राजा रानी को बाद में सन्देह की दृष्टि से देखता है और आधुनिक कथा में जगपती तथा चन्दा को उन्हीं परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। अतः सम्पूर्ण कहानी के मूल कथन को संकेत रूप से प्रकट करने के कारण यह शीर्षक उपयुक्त है। कहानी लम्बी होने पर भी पाठक का तारतम्य टूटता नहीं है। उसके परिणाम के लिए पाठक को अन्त तक कहानी पढ़नी पड़ती है। इसी में शीर्षक की सार्थकता है। इस कहानी में अर्थ, यौन, सम्पत्ति, बेरोजगारी और स्त्री की मजबूरी का वर्णन हुआ है। अर्थ लोलुपता के कारण गिरते नैतिक मूल्यों व खण्डित आदर्शों का परिणाम अन्ततः निराशा, हताशा व अवसाद में होता है। इसी युगीन विडम्बना को लेखक ने अभिव्यक्ति प्रदान की है। 

    कहानी का सबसे बड़ा सन्देश यह है कि यह पुरुष प्रधान समाज है। पुरुष स्वयं चाहे कितनी त्रुटियाँ कर ले, किन्तु स्त्री की एक छोटी-सी भूल को वह क्षमा नहीं करता। यहाँ तक हर युग में स्त्रियों को सीता की भाँति अग्नि परीक्षा देनी ही पड़ती है। 

    प्रस्तुत कहानी की भाषा में एक सहज ताजगी है, जो अपनी सहजता से पाठकों को बाँधे रहती है। कहानी में बोलचाल की भाषा से साहित्यिक भाषा को अपूर्ण कथ्य क्षमता प्रदान की गई है। इस प्रकार कमलेश्वर ने बोलचाल की भाषा को तराश कर उसे एक अभिन्न साहित्यिक अभिजात्य प्रदान किया। 

    इस प्रकार कह सकते हैं कि 'राजा निरबंसिया' कहानी आर्थिक विवशताओं द्वारा दाम्पत्य सम्बन्धों की मधुरता को कड़वाहट में बदलने, सन्तानहीन दम्पति की सामाजिक स्थिति और मानसिक पीड़ा की कहानी है, जो आधुनिक युग के टूटते जीवन मूल्यों, आस्थाओं, विश्वासों तथा मजबूरियों को स्पष्ट करती है।

    राजा निरबंसिया कहानी के महत्‍वपूर्ण तथ्‍य 

    1. 20वी. सदी के प्रसिद्ध लेखक है । 
    2. लोककथा के माध्यम से वर्तमान के दुःख-दर्द को व्यक्त किया गया है। 
    3. राजा निरबंसिया पौराणिक कथा के साथ-साथ चंदा की आधुनिक कथा के द्वारा समांतर दोहरी कथा के माध्यम से आधुनिक जीवन की विसंगतियों का चित्रण करती एक नयी कहानी है। 
    4. चंदा जगपती की बीमारी और बेरोज़गारी से उपजी आर्थिक मजबूरियों से हताश है।
    5. जगपती के माध्यम से निम्न मध्यवर्गीय समाज का चित्रण। 
    6. संतानहीन दम्पति की सामाजिक और मानसिक पीड़ा का चित्रण। 
    7. समाज में स्त्री की छवि और उनके प्रति समाज का दृष्टिकोण। 
    8. कर्ज के कारण आत्महत्या करने वाले मेहनतकश लोगों का चित्रण। 
    9. यह कहानी शिल्प की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।
    10. स्वमं कमलेश्वर इस कहानी के संदर्भ में कहते है कि- "आर्थिक अभाव से टूटते दाम्पत्य जीवन की मनोदशा का सूक्ष्म वर्णन करती है यह कहानी।"

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    Raja Nirbansiya Kahani MCQ

     प्रश्‍न 01. निम्नलिखित में से किस उपन्यास पर कमलेश्वर जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया । 

    1. तीसरा आदमी 
    2. समुद्र में खोया हुआ आदमी 
    3. रेगिस्तान 
    4. कितने पाकिस्तान 

    उत्तर: 4. कितने पाकिस्तान


     प्रश्‍न 01. राजा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सी बात गलत है । 

    1. राजा के 2 पुत्र हुए थे । 
    2. राजा को सुपारी उनके दो पुत्र लाकर देते हैं 
    3. पहले राजा स्वीकार नहीं करते है की, तीनो पुत्र उन्ही के है 
    4. राजा के दोनों लड़के का जन्म सकट का था |

    उत्तर: 3.  पहले राजा स्वीकार नहीं करते है की, तीनो पुत्र उन्ही के है

     

     प्रश्‍न 01. जगपति कैसे मरता है ? 

    1. अफीम और गाजा पीकर 
    2. अफीम और भांग पीकर 
    3. अफीम और दारू पीकर 
    4. अफीम और तेल पीकर 

    उत्तर: 4. अफीम और तेल पीकर

     प्रश्‍न 01. अपने हाथों से चंदा के हाथों में कड़ा कौन पहनता है ? 

    1. जगपति 
    2. बच्चन 
    3. जमुना 
    4. भट्टारिन 

    उत्तर: 2. बच्चन 


     प्रश्‍न 01. जगपति चंदा से कितने दिन के बाद वापस आने के लिए बोला था ? 

    1. सात 
    2. आठ 
    3. दस 
    4. ग्यारह 
    उत्तर: 3. दस 

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