परिन्दे कहानी - निर्मल वर्मा

परिन्दे 'एक दुनिया समानान्तर' में संकलित सर्वश्रेष्ठ कहानियों में से एक है, जिसके लेखक निर्मल वर्मा हैं। कथा साहित्य और यात्रा साहित्य में निर्मल वर्मा आधुनिक हिन्दी साहित्य में शिखर रचनाकार माने जाते हैं। परिन्दे कहानी की विशेषता यह है कि कुछ समीक्षकों ने इसी से नई कहानी आन्दोलन की शुरुआत मानी है। 

इस कहानी का केन्द्रीय कथ्य मध्यवर्गीय जीवन में व्याप्त अकेलापन है। सभी चरित्र न सिर्फ अकेले हैं, बल्कि कभी न खत्म होने वाले इन्तजार की प्रक्रिया में बोझिल, उदास और टूटे हुए हैं। इसी इन्तजार की समरूपता को आधार बनाकर लेखक ने इसका नाम 'परिन्दे' रखा है। 

    निर्मल वर्मा का जीवन परिचय

    नाम - निर्मल वर्मा (Nirmal Verma) 

    जन्म - 3 अप्रैल, 1929 (शिमला, हिमाचल प्रदेश) 

    निधन - 25 अक्टूबर, 2005 नई दिल्ली

    पिता का नाम - श्री नंद कुमार वर्मा 

    पेशा - लेखक, पत्रकार 

    विधाएँ - नाटक, कहानी, उपन्यास, निबंध, यात्रा वृतांत और अनुवाद 

    उपन्यास - वे दिन, लाल टीन की छत, रात का रिपोर्टर व एक चिथड़ा सुख आदि। 

    कहानी - परिंदे, पिछली गर्मियों में, जलती झाड़ी व कौवे और काला पानी आदि। 

    नाटक - तीन एकांत (1976)

    यात्रा वृतांत - चीड़ो पर चाँदनी (1962)

    निबंध - कला का जोखिम, शब्द और स्मृति, सर्जना- पथ के सहयात्री आदि। 

    सम्मान - पद्म भूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार। 

    परिन्दे कहानी - निर्मल वर्मा

    प्रथम प्रकाशन : हंस, (1957 ई.) 

    कहानी संग्रह : परिंदे (1959 ई.) 

    1. डायरी का खेल मा 
    2. माया का मर्म 
    3. तीसरा गवाह 
    4. अंधेरे में 
    5. पिक्चर पोस्टकार्ड 
    6. सितंबर की एक शाम 
    7. परिंदे
    Parinde Kahani - Nirmal Verma

    परिन्दे कहानी का विषय

    • नारी मन:स्थिति का चित्रण 
    • आधुनिक मनुष्य की व्यथा, अकेलेपन, उसकी मानसिक यातनाओं का चित्रण। 
    • प्रेम के त्रिकोण रूप का वर्णन।
    • जीवन के आंतरिक लय और भावबोध को खोलती है। 

    परिन्दे कहानी के प्रमुख पात्र 

    लतिका - कहानी की केन्द्रीय पात्र है, जिसके इर्द-गिर्द कहानी घूमती है। वह लड़कियों के एक मिशनरी स्कूल के छात्रावास की वार्डन है। 

    मेजर गिरीश नेगी - लतिका का पूर्व प्रेमी, जिसकी मृत्यु हो गई है, किन्तु लतिका अपने पूर्व प्रेमी की स्मृति में ही खोई रहती है। 

    मि. ह्यूबर्ट - संगीत शिक्षक, पियानो बहुत मन से बजाते हैं। लतिका से प्रेम करता है, भावुक याचना से भरा हुआ प्रेमपत्र भी लिख चुका था। 

    डॉ. मुखर्जी  - लतिका का एक सहकर्मी है, जो अपनी पत्नी और देश से अत्यन्त प्रेम करता है, किन्तु दोनों ही उससे छूट जाते हैं। साथ ही वह लतिका को समझाने की कोशिश भी करता है। इनके अतिरिक्त जूली, मिस वुड आदि पात्र भी कहानी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    प्रिंसिपल मिस वुड - पोपला मुँह, आँखों के नीचे झूलती हुई माँस की थैलियाँ, ज़रा-ज़रा सी बात पर चिढ़ जाना, कर्कश आवाज में चीखना- सब उसे 'ओल्डमेन' कहकर पुकारते हैं।

    सुधा - होस्टल में शायद वह सबसे अधिक लोकप्रिय लड़की। 

    जूली - होस्टल की लड़की, जिसका प्रेमपत्र लतिका के हाँथ लग गया है। 

    करीमुद्दीन - होस्टल का नौकर, मिलिट्री में अर्दली रह चुका था। 

    एल्मण्ड - फादर 

    'परिन्दे' कहानी की समीक्षा 

    परिन्दे कहानी की नायिका लतिका है। वह अकेलेपन की पीड़ा मन में लिए जीने को विवश है। उसका प्रेमी मेजर गिरीश नेगी मर चुका है। मृत प्रियतम की स्मृति में वह जीती है। हॉस्टल के मायूस वातावरण में जीवन बिताती है। वह जानती है कि अतीत कभी वापस नहीं आ सकता फिर भी वह सदा उससे चिपके रहना पसन्द करती है अर्थात् अपने स्वर्गीय प्रियतम से अलग होकर भी वह अलग नहीं होती। वह कहाँ जाएगी? यही उसके सामने एक सवाल है जो अनुत्तरित रह जाता है। 'परिन्दे' कहानी में टूटे प्यार की संवेदना काफी महत्त्वपूर्ण है। 'ह्यूबर्ट', 'लतिका' की ओर आकृष्ट है, पर प्रेमपत्र देने के बाद उसे लतिका के बारे में सोचकर दुःख होता है। पश्चाताप के कारण लतिका से अपने को अलग करने को एक प्रकार से अभिशप्त है। ऐसी एक प्रेम संवेदना के माध्यम से कथाकार आधुनिक मानव की गहरी विडम्बना को बेनकाब करते हैं। 

    लतिका अपने सहकर्मी ह्यूबर्ट के प्रेम से आँखें चुराती है। एक अन्य सहकर्मी डॉक्टर मुखर्जी लतिका को समझाने की कोशिश करते हैं। लतिका गिरीश की स्मृतियों से जोंक की तरह चिपकी हुई है, जबकि वह स्वयं भी समझती है कि उसका अतीत उसे जीवन में आगे नहीं बढ़ने दे रहा है। कहानी में परिन्दे जीवन में प्रेम के, वर्तमान में लगाव के प्रतीक हैं ये ऊष्मा की तलाश में अपने को छोड़कर अनजान देशों की ओर उड़ जाते हैं। इस प्रकार 'परिन्दे' प्रतीकात्मक कहानी है, जिसमें परिन्दों के माध्यम से मनुष्य जीवन की एक विशेष स्थिति की ओर संकेत किया गया है। देखा जाए तो 'परिन्दे' की लतिका की समस्या स्वतन्त्रता या मुक्ति की समस्या है। अतीत से मुक्ति, स्मृति से मुक्ति, उस चीज से मुक्ति जो हमें चलाती रहती है। कथाकार ने अतीत के क्षणों को पुनर्जीवित करने का प्रयास करके जीवन को नए अर्थ और अभिव्यक्ति ढूँढने का प्रयास 'परिन्दे' के माध्यम से किया है।

    कथाकार ने 'अँधेरे' के माध्यम से एक विशेष मानसिक अनुभूति को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। 'अँधेरे' की तरह अपनी नियति पर जीने वाले पात्र भी इसमें हैं। छुट्टियों के समय जब छात्र हॉस्टल से निकल जाते हैं, तब लतिका अनजान देश की ओर उड़ने वाले 'परिन्दों' को देखती रहती है, वह उनके माध्यम से अपनी नियति का पर्दाफाश करना चाहती है। प्रवास, भटकन, अजनबीपन, अस्तित्वबोध सबकी मानसिक दुविधा यहाँ देखी जा सकती है। 

    इसका अन्त उदासी और अनिर्णय के बीचोंबीच नहीं होता, बल्कि एक सुखद संकेत पर होता है। डॉ. मुखर्जी लतिका को समझाते हैं कि जिन्दगी को जहाँ तक सम्भव हो कायदे से जीना चाहिए। बीते हुए दुःखों से चिपके रहना ठीक नहीं है। अन्ततः लतिका महसूस करती है कि प्रेमी की मृत्यु हो जाना जीवन का अन्त नहीं है। जूली का पहला प्रेम पत्र, जो उसने वार्डन होने के कारण अपने पास रख लिया था उसके (जूली) तकिए के बीच रख आती है। जिसका संकेत है कि वह अपने और दूसरे व्यक्ति के जीवन में रंग भर देना चाहती है। निर्मल वर्मा की अभिव्यंजना शैली बहुत सुन्दर है। उनके वर्णन अत्यन्त सुन्दर व सजीव हैं। ये वर्णन दृश्य जगत के हों चाहे मानसिक जगत के, सर्वत्र अत्यन्त प्रभावपूर्ण हैं। लाक्षणिता, चित्रोपमता कुछ स्थलों पर विशेष रूप से स्पष्ट हैं। 

    सारांशतः परिन्दे कहानी हिन्दी की अन्य कहानियों से कुछ हटकर है, जिसमें विशेष संवेदनापूर्ण स्थिति का चित्रण अत्यन्त सशक्त एवं प्रभावोत्पादक शैली में किया गया है। इसका कोई तत्त्व अलग से नहीं दिखाई देता है, मानो सब कुछ इसके उत्पन्न परिवेश से घुल गया है। अपनी इस अन्विति में यह विशेष प्रभाव उत्पन्न करती है, जो पाठक के मन पर देर तक बना रहता है। इसकी संवेदनशीलता पाठक को सोचने पर मजबूर कर देती है।

    परिन्दे कहानी के महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

    • परिंदे कहानी का प्रकाशन 1960 में हुआ। जो कि एक दुनिया समानांतर में संकलित है। 
    • अकेलेपन के जीवन को और अकेलेपन से जूझते हुए कई परेशानियों का जिक्र मिलता है। यही कारण है कि इस कहानी का नाम परिंदे रखा गया है। 
    • कहानी लतिका नामक पात्र के इर्दगिर्द घूमती है। जहाँ वो अपने भूतकाल के जीवन से न उभर पाने की पीड़ा में चिंतित है और बेहद अकेली भी। 
    • कॉन्वेंट स्कूलों के वातावरण का अंकन । 
    • नामवर सिंह ने इस कहानी को हिंदी की पहली कहानी माना है।

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    Parinde Kahani MCQ

     प्रश्‍न 01. निम्न में से कौन परिन्दे कहानी का पात्र नहीं है? 

    1. करीमुद्दीन 
    2. हेमन्ती 
    3. सुधी 
    4. डॉ. मुखर्जी

    उत्तर: 3. सुधी


     प्रश्‍न 02. "अजी मेम साहब, अभी क्या सर्दी आई है, बड़े दिनों में देखना, कैसे दाँत कटकटाते हैं।" कहानी में यह पंक्तियाँ किसके द्वारा कही गई है 

    1. मेजर गिरीश 
    2. मि. ह्यबूर्ट 
    3. डॉ. मुखर्जी 
    4. करीमुद्दीन

    उत्तर: 4. करीमुद्दीन


     प्रश्‍न 03. परिंदे कहानी की कथा भूमि है 

    1. कॉन्वेंट स्कूल 
    2. कोलम्बस स्कुल 
    3. ओक्सफोर्ड स्कुल 
    4. इनमें से कोई नहीं

    उत्तर: 1. कॉन्वेंट स्कूल


     प्रश्‍न 04. नई कहानी की प्रथम कृति है 

    1. मिसपाल 
    2. परिंदें 
    3. ठाकुर का कुआं 
    4. अभिशप्त

    उत्तर: 2. परिंदें


     प्रश्‍न 05. निर्मल वर्मा का पहला कहानी संग्रह कौन सा है । 

    1. परिंदे 
    2. वे दिन 
    3. प्रिय राम 
    4. इनमें से कोई नहीं

    उत्तर: 1.  परिंदें


     प्रश्‍न 06. निर्मल वर्मा की परिंदे कहानी को किसने प्रथम कहानी माना है ? 

    1. नंददुलारे वाजपेई 
    2. हजारी प्रसाद 
    3. नामवर सिंह 
    4. रामविलास शर्मा
    उत्तर: 3. नामवर सिंह

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