इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर कहानी - हरिशंकर परसोई

हरिशंकर परसाई हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक और व्यंग्यकार थे। उन्होंने अपने व्यंग्य के माध्यम से पाठकों का ध्यान बार-बार समाज की कमजोरियों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं शोषण पर करारा व्यंग्य किया, जो हिन्दी साहित्य में अनूठा है। इस प्रकार परसाई जी ने हिन्दी साहित्य में व्यंग्य को नई पहचान दी और उसे एक अलग रूप प्रदान किया। 

    कहानी संग्रह : ठिठुरता हुआ गणतंत्र

    संग्रहः- ठिठुरता हुआ गणतंत्र (1970 ई.) 

      1. ठिठुरता हुआ गणतंत्र 
      2. कर कमल हो गए 
      3. वह जो आदमी है न 
      4. राम की लुगाई और गरीब की लुगाई 
      5. सद्गुरु का कहना 
      6. हम बिहार में चुनाव लड़ रहे हैं 
      7. छोटी सी बात 
      8. इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर 
      9. फिल्मी रोमांच 
      10. प्रेम पुजारी : अगर मैं फिल्म बनाता
      11. मुखड़ा क्या देखें फोटो में 
      12. सबटेनेंट की कथा 
      13. फोन टालने की कला 
      14. अपना चाचा- एशियाई फ्लू 
      15. दूसरे की महिमा ढोने वाले 
      16. मेरे जीबकट के नाम 
      17. एक काना : एक ऐंचकताना 
      18. चाँद पर नहीं जा सका 
      19. साहित्य और नम्बर दो का कारोबार 
      20. ग्रांट अभी तक नहीं आई 
      21. तटस्थ
      22. बारात की वापसी 
      23. एक सुपरमैन 
      24. पाँच लोक कथाएँ
    Inspector Matadin Chand Par - Harishankar Parsai

    इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर कहानी का विषय 

    • भारतीय पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली पर व्यंग्य 
    • भ्रष्ट पुलिस व्यवस्था पर व्यंग्य 
    • निर्दोष को दोषी करार देने पर व्यंग्य 
    • पुलिस द्वारा विज्ञान एवं वैज्ञानिकों के नकारने पर व्यंग्य
    • चाँद के काल्पनिक चित्रण द्वारा भारतीय पुलिस एवं व्यवस्था पर व्यंग्य।

    इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर कहानी के प्रमुख पात्र 

    मातादीन - कहानी का प्रमुख पात्र है, जिसके इर्द-गिर्द पूरी कहानी घूमती है। मातादीन पुलिस इंस्पेक्टर है, जिसके कार्य से खुश होकर पुलिस विभाग उसे चाँद की पुलिस को सुधारने के लिए भेजता है। इस प्रकार वह पूरे पुलिस विभाग का प्रतिनिधित्व करता है। 

    पुलिस मन्त्री - कहानी का एक अन्य पात्र है, जो मातादीन को प्रोत्साहित करता है तथा ऐसा कार्य करने को कहता है, जिससे पुलिस विभाग की जय जयकार हो जाए। 

    यान चालक - चाँद से मातादीन को लेने आया है, जो मातादीन के अधिक प्रश्न करने पर टिप्पणी करता है कि चाँद के आदमी इतना नहीं बोलते हैं। 

    कोतवाल और इंस्पेक्टर - ये दोनों पात्र चाँद की पुलिस के सिपाही हैं, जो चाँद पर एक केस सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। 

    'इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर' कहानी की समीक्षा 

    'इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर' हरिशंकर परसाई की लोकप्रिय व्यंग्य रचना है, जिसमें पुलिस के अत्याचारों की ओर देश की जनता का ध्यान ले जाने वाली व्यंग्य कथा वर्णित है। इस रचना से परसाई जी ने पुलिस प्रशासन की न सिर्फ कार्यप्रणाली पर करारा व्यंग्य किया है, बल्कि हमारी कार्यपालिका के निर्णयों पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है। 

    यह फैंटेसी शैली में लिखी गई रचना है। फैंटेसी का सहारा लेकर ही लेखक ने इंस्पेक्टर मातादीन को पुलिस व्यवस्था सुधारने के लिए चाँद पर भेजा है। कथा में हास्यजनक स्थितियों और विसंगतियों का भी वर्णन किया गया है। 

    कहानी में पुलिस प्रशासन में व्याप्त मक्कारी, झूठ और बेईमानी आदि की परतें खोलने में इंस्पेटर मातादीन मुख्य पात्र की भूमिका में दिखाई देता है, जो चाँद की पुलिस को सुधारने के लिए जाता है। वहाँ पहुँचकर वह सबसे पहले पुलिस लाइन में हनुमानजी की स्थापना करवा देता है, फिर वह देखता है कि चाँद पर पुलिस काम नहीं कर रही है, तो कार्य के प्रति उनकी कटिबद्धता बढ़ाने के लिए पुलिस का वेतन कम करवा देता है, जिससे केसों की संख्या बढ़ जाती है। वेतन कम होने से पुलिस अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऊपरी आमदनी करने लगती है। इस प्रकार पुलिस काम करने लगती है और सरकार भी खुश हो जाती है।

    साथ ही इंस्पेक्टर मातादीन चाँद की पुलिस को शिक्षित करता है कि कत्ल के केस में कातिल को ढूँढने के बजाय एविडेंस पर जोर देना चाहिए। एविडेंस मिल जाए तो किसी को भी कातिल बनाया जा सकता है फिर चाहे वह भला आदमी ही क्यों न हो। उसके कारण भले आदमी को सजा हो जाती है। एफ. आई. आर बदलना, बीच में पन्ने डालना, गवाहों को तोड़ना, यह सब वह चाँद की पुलिस को सिखा देता है, उसके इस योगदान के लिए चाँद की पुलिस उसका अभिनन्दन करती है। मातादीन को वापस पृथ्वी पर भेज दिया जाता है। उसके जाने पर चाँद के पुलिस वाले रोने लगते हैं। इस कहानी में परसाई जी ने पुलिस प्रशासन का पूरा चिट्ठा खोल दिया है कि कैसे झूठी गवाहियों के कारण न जाने कितने निर्दोष लोगों को सजा करवा दी जाती है। कहानी में जिस व्यक्ति ने पीड़ित की मदद की उसे बीस साल की सजा हो जाती है। यहाँ पुलिस के व्यवहार का बहुत सच्चा चित्र खींचा गया है। इस कहानी में ऐसी कोई भी बात छूटने नहीं पाई है, जो पुलिस विभाग में न होती हो। 

    इस प्रकार परसाई जी ने गागर में सागर भरने का कार्य किया है। कहानी में हवलदार द्वारा इंस्पेक्टर साहब को 'पेक्टम' बुलाना बहुत स्वाभाविक बन गया है।

    परसाई जी की चित्रात्मक भाषा-शैली के सामने पूरा पुलिस विभाग खड़ा हो जाता है। इस कहानी के प्रत्येक संवाद में व्यंग्य छिपा हुआ है। संवाद छोटे हैं, लेकिन अपने आप में पूर्ण हैं। 

    इस व्यंग्य कथा की सार्थक परिणति उस मानवीय करुणा और मानव कल्याण के गम्भीर, गहरे और व्यापक अहसास के सम्प्रेषण में है, जो उक्त कथा की अन्तिम पंक्तियों में व्यंजित की गई है- "आपके मातादीन ने हमारी पुलिस को जैसा कर दिया है, उसके नतीजे ये हुए हैं: कोई आदमी किसी मरते हुए आदमी के पास नहीं जाता, इस डर से कि वह कत्ल के मामले में फँस जाएगा। बेटा बीमार बाप की सेवा नहीं करता वह डरता है, बाप मर गया, तो उस पर कहीं हत्या का आरोप नहीं लगा दिया जाए बच्चे नदी में डूबते रहते हैं और कोई नहीं बचाता। इस डर से कि उस पर बच्चों को डुबोने का आरोप न लग जाए।" 

    इस वर्णन से स्पष्ट है कि देश की आम जनता कितने भयावह सन्त्रास में जी रही है। समाज की यह स्थिति हृदय को हिला देती है। मानवीय करुणा का यह अहसास एक अर्थपूर्ण आक्रोश की दिशा में सक्रियता प्रदान करता है। यह कहानी फैंटेसी में रची गई है, लेकिन जो स्थितियाँ वहाँ बयान की गई हैं वे हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक पहलू हैं। कहानी में दर्शाई गई विसंगतियों से हम कहीं-न-कहीं दो चार होते रहते हैं। ये स्थितियाँ अत्यन्त डरावनी और अमानवीय हैं। डरावनी इसलिए हैं, क्योंकि हमें समाज में होने वाले कार्य अस्वाभाविक नहीं लगते हैं। 

    इस प्रकार कह सकते हैं कि प्रस्तुत कहानी में हरिशंकर परसाई ने समाज में व्याप्त विसंगतियों और मनुष्य मात्र के पाखण्ड को उजागर किया है। पुलिस प्रशासन पर उन्होंने व्यंग्य करते हुए आम आदमी के भोगे हुए यथार्थ को वाणी दी है, इसलिए परसाई जी को आम आदमी का लेखक माना जाता है।

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    Inspector Matadin Chand Par Kahan MCQ

     प्रश्‍न 01. इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर कहानी का प्रकाशन वर्ष क्या है ? 

    1. 1909 
    2. 1910 
    3. 1911 
    4. 1912

    उत्तर: 2. 1910


     प्रश्‍न 02. इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर कहानी किस तरह की श्रेणी में आती है ? 

    1. ऐतिहासिक 
    2. पौराणिक 
    3. व्यंग्यात्मक 
    4. हास्यास्पद 

    उत्तर: 3. व्यंग्यात्मक


     प्रश्‍न 03. इन्स्पेक्टर मातादीन कहानी के अनुसार गृहमंत्री ने किससे कहा कि चांद पर किसी आई. जी. को भेज दो ? 

    1. डी. आई. जी. से 
    2. इंस्पेक्टर मातादीन से 
    3. सचिव से 
    4. मुख्यमंत्री से

    उत्तर: 3. सचिव से 


     प्रश्‍न 04. मातादीन के यान में कदम रखते समय " चांद से एड़ी चमकाने का पत्थर लेते आना" एस.पी. साहब का यह संदेश मातादीन को कौन सुनाता है? 

    1. हवलदार बलभद्दर 
    2. हवलदार रामसजीवन 
    3. मुंशी अब्दुल गफूर 
    4. मातादीन की पत्नी

    उत्तर: 2. हवलदार रामसजीवन


     प्रश्‍न 05. इंस्पेक्टर मातादीन कहानी के अनुसार -"प्रविसी नगर कीजै सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा" उपरोक्त पंक्ति किस पत्र के द्वारा कही गई है -

    1. सचिव 
    2. मातादीन 
    3. लेखक 
    4. रामसजीवन

    उत्तर: 2. मातादीन 


     प्रश्‍न 06. निम्न में से इंस्पेक्टर माता दिन चॉंद  पर कहानी के पात्र हैं ? 

    1. राष्ट्रपति 
    2. मुख्यमंत्री 
    3. राज्यपाल 
    4. गृहमंत्री 

    उत्तर: 4. गृहमंत्री 


     प्रश्‍न 07. इंस्पेक्टर मातादीन कहानी के अनुसार मातादीन कितने साल पहले पुलिस में भर्ती हुए थे? 

    1. 20 साल 
    2. 26 साल 
    3. 28 साल 
    4. 30 साल 

    उत्तर: 2. 26 साल


     प्रश्‍न 08. मातादीन ने बेकसूर आदमी को कितने साल की सजा दिलवाई ? 

    1. 10 साल 
    2. 15 साल 
    3. 20 साल 
    4. 5 साल
    उत्तर: 3. 20 साल

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